रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एक बार फिर दुनिया भर में चर्चा का विषय बने हुए हैं। इस बार वजह युद्ध, राजनीति या परमाणु शक्ति नहीं बल्कि ‘बुढ़ापे को रोकने’ की महत्वाकांक्षी योजना है। रूस ने आधिकारिक तौर पर ऐसे प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया है जिसे वहाँ के अधिकारी ‘एंटी-एजिंग वैक्सीन’ (Anti-Aging Vaccine) या ‘बुढ़ापे के खिलाफ जीन थेरेपी’ बता रहे हैं।
दावा किया जा रहा है कि यह तकनीक इंसानी कोशिकाओं की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा कर सकती है। रूस सरकार ने इसके लिए 2 ट्रिलियन रूबल यानी करीब 26 अरब डॉलर (करीब ₹2.5 लाख करोड़) से ज्यादा का बजट तय किया है। यह सिर्फ कोई वैज्ञानिक प्रयोग नहीं, बल्कि रूस की राष्ट्रीय नीति का हिस्सा बन चुका है।

तेजी से घटती आबादी, कम होती औसत आयु और सत्ता के शीर्ष पर बैठे बुजुर्ग नेतृत्व के बीच रूस अब लंबी और स्वस्थ जिंदगी को राष्ट्रीय मिशन की तरह पेश कर रहा है। लेकिन इस पूरे प्रोजेक्ट के केंद्र में व्लादिमीर पुतिन का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है।
आखिर क्या है रूस की एंटी-एजिंग वैक्सीन?
रूस के विज्ञान एवं उच्च शिक्षा मंत्रालय के उपमंत्री डेनिस सेकीरिंस्की ने खुलासा किया कि वैज्ञानिक ‘RAGE’ नाम के एक रिसेप्टर पर काम कर रहे हैं। RAGE यानी ‘Receptor for Advanced Glycation Endproducts’ शरीर की कोशिकाओं में उम्र बढ़ने की प्रक्रिया से जुड़ा माना जाता है।
रूसी वैज्ञानिकों का दावा है कि जब यह रिसेप्टर सक्रिय होता है तो कोशिकाएँ बूढ़ी होने लगती हैं। अगर इसे ब्लॉक कर दिया जाए, तो कोशिकाओं की ‘युवावस्था’ लंबे समय तक बरकरार रखी जा सकती है। रूस इसे पारंपरिक वैक्सीन की तरह नहीं बल्कि ‘जीन थेरेपी ड्रग’ बता रहा है।
मतलब यह शरीर के भीतर जाकर कोशिकाओं के व्यवहार को प्रभावित करने की कोशिश करेगी। रूसी अधिकारियों का कहना है कि उनका लक्ष्य दुनिया की पहली ऐसी जीन थेरेपी तैयार करना है जो सीधे बुढ़ापे की जैविक प्रक्रिया को निशाना बनाए। हालाँकि अभी तक इस तकनीक का परीक्षण केवल लैब और जानवरों पर हुआ है।
इंसानों पर क्लिनिकल ट्रायल शुरू नहीं हुए हैं। रूस की उप प्रधानमंत्री तात्याना गोलिकोवा ने कहा है कि 2028 से 2030 के बीच इस एंटी-एजिंग दवा का उत्पादन शुरू हो सकता है।
क्यों बुढ़ापे से लड़ना चाहता है रूस?
रूस इस समय गंभीर जनसंख्या संकट से गुजर रहा है। वहाँ पुरुषों की औसत आयु करीब 67 साल मानी जाती है, जो अमेरिका और कई यूरोपीय देशों से काफी कम है। लगातार युद्ध, शराबखोरी, स्वास्थ्य समस्याएँ और घटती जन्मदर रूस के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी हैं।
रूस का दावा है कि इससे लाखों लोगों की जिंदगी लंबी और स्वस्थ हो सकती है। इस प्रोजेक्ट के तहत सिर्फ एंटी-एजिंग दवा ही नहीं, बल्कि जैविक उम्र मापने वाली टेस्ट सिस्टम, उम्र से जुड़ी बीमारियों की शुरुआती पहचान और दिमागी क्षमताओं को सुधारने वाले उपकरणों पर भी काम हो रहा है। रूसी सरकार इसे भविष्य की चिकित्सा क्रांति की तरह पेश कर रही है।
पुतिन और उनका ‘अमरता’ का जुनून
व्लादिमीर पुतिन की छवि हमेशा से एक मजबूत, ऊर्जावान और बेहद फिट नेता की रही है। घोड़े पर बिना शर्ट के बैठना, बर्फीले पानी में तैरना, जूडो खेलना, आइस हॉकी खेलना, जंगलों में लंबी सैर करना, रूसी प्रचार मशीन ने सालों से पुतिन को ‘अल्फा मेल’ की तरह पेश किया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुतिन अपने स्वास्थ्य और लंबी उम्र को लेकर बेहद सजग हैं। वह कम शुगर वाला हाई-प्रोटीन डाइट लेते हैं, मछली और ताजी सब्जियाँ खाते हैं, रोजाना वर्कआउट करते हैं और नियमित तैराकी करते हैं। रूस और पश्चिमी मीडिया में कई बार यह भी दावा किया गया कि पुतिन ‘एंटलर बाथ’ लेते हैं।
इसमें हिरण के युवा सींगों से निकाले गए अर्क वाले गर्म पानी में स्नान कराया जाता है। समर्थक दावा करते हैं कि इससे त्वचा और शरीर को ‘युवा’ बनाए रखने में मदद मिलती है, हालाँकि वैज्ञानिक रूप से यह पूरी तरह प्रमाणित नहीं है। इस प्रक्रिया को लेकर पशु क्रूरता के आरोप भी लगते रहे हैं।
रूसी मीडिया में यह भी चर्चा रही कि पुतिन लंबे समय तक सत्ता में बने रहने की सोच रखते हैं। 2020 में रूस के संविधान में बदलाव के बाद उनके लिए 2036 तक राष्ट्रपति बने रहने का रास्ता खुल गया। उस समय उनकी उम्र 83 साल होगी।
पुतिन और शी जिनपिंग की ‘अमरता’ वाली बातचीत
इस मुद्दे ने तब और सुर्खियाँ बटोरीं जब चीन में एक सैन्य परेड के दौरान पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बातचीत ‘हॉट माइक’ में रिकॉर्ड हो गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बातचीत में पुतिन ने कहा कि बायोटेक्नोलॉजी के विकास के साथ इंसानों के अंग लगातार बदले जा सकेंगे और लोग और ज्यादा युवा होते जाएँगे, यहाँ तक कि अमरता भी संभव हो सकती है।
जवाब में शी जिनपिंग की तरफ से कहा गया कि इस सदी के अंत तक इंसान 150 साल तक जी सकता है। यह बातचीत सिर्फ सामान्य चर्चा नहीं मानी गई, क्योंकि दोनों नेता लंबे समय तक सत्ता में बने रहने की महत्वाकांक्षा से जुड़े रहे हैं। चीन और रूस दोनों में नेतृत्व तेजी से केंद्रीकृत हुआ है और दोनों देशों में लंबी उम्र को लेकर शीर्ष स्तर पर रुचि दिखाई देती रही है।
इस प्रोजेक्ट के पीछे कौन लोग हैं?
रूस की खोजी मीडिया संस्था Meduza की रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे एंटी-एजिंग प्रोजेक्ट के पीछे पुतिन के करीबी और कुरचातोव इंस्टीट्यूट के प्रमुख मिखाइल कोवालचुक की बड़ी भूमिका बताई जाती है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि कोवालचुक ‘अनंत जीवन’ और ‘रूसी जीनोम’ जैसी अवधारणाओं को लेकर बेहद उत्साहित रहते हैं।
इसी नेटवर्क में पुतिन की कथित बड़ी बेटी मारिया वोरोन्त्सोवा का नाम भी आता है, जो एंडोक्रिनोलॉजिस्ट हैं और रूस के जेनेटिक्स व लंबी उम्र से जुड़े रिसर्च प्रोग्राम से जुड़ी बताई जाती हैं। रूस में उम्र बढ़ने की प्रक्रिया और जीन आधारित चिकित्सा पर कई सरकारी प्रोजेक्ट चल रहे हैं।
पुतिन के करीबी माने जाने वाले वैज्ञानिक व्लादिमीर खाविन्सन भी लंबे समय तक ‘एंटी-एजिंग’ शोध से जुड़े रहे। उन्होंने पेप्टाइड आधारित कई दवाओं और सप्लीमेंट्स पर काम किया था।









