अड़ियल ट्रम्प ने चीन में खड़े होकर फिर ईरान को ललकारा, कहा “समझौता करो या विनाश के लिए तैयार रहो” |

अपनी तीन दिवसीय चीन यात्रा के अंतिम चरण में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर अब तक का सबसे कड़ा रुख अख्तियार किया है। ‘फॉक्स न्यूज’ को दिए एक विशेष साक्षात्कार में ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया कि ईरान के पास अब केवल दो ही रास्ते बचे हैं—या तो वह परमाणु कार्यक्रम और संघर्ष को खत्म करने के लिए ‘समझौता’ करे, या फिर पूरी तरह ‘विनाश’ का सामना करने के लिए तैयार रहे। राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान की वर्तमान स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वह आर्थिक और सैन्य रूप से ‘तबाह’ हो चुका है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा।

तीन दिवसीय चीन यात्रा के अंतिम दिन ‘फॉक्स न्यूज’ को दिए साक्षात्कार के दौरान ट्रंप ने कहा, ‘‘ईरान के लिए विकल्प है- समझौता या विनाश।’’ उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका ‘‘ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा।’’ ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ ईरान समेत विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा के बाद कहा, ‘‘वे अब खत्म हो चुके हैं। वे समझौता कर सकते हैं या फिर वे पूरी तरह खत्म हो जाएंगे।’’

साक्षात्कार के दौरान ट्रंप ने कहा, ‘‘राष्ट्रपति शी अमेरिका और ईरान के बीच समझौता होते देखना चाहते हैं।’’ उन्होंने बताया कि शी ने मदद की पेशकश करते हुए कहा, ‘‘यदि मैं किसी भी तरह मदद कर सकता हूं, तो मैं करना चाहूंगा।’’ ट्रंप ने कहा कि चीन भी नहीं चाहता कि ईरान परमाणु हथियार रखे। ट्रंप ने यह भी कहा कि ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन ने उन्हें बताया कि अमेरिका ईरान के खार्ग द्वीप को महज ‘‘चार से पांच मिनट’’ में पूरी तरह बर्बाद कर सकता है।

चीन द्वारा ईरान को समर्थन दिए जाने के सवाल पर ट्रंप ने कहा कि इस मुद्दे पर शी चिनफिंग से चर्चा हुई और उन्होंने आश्वासन दिया कि चीन ‘‘ईरान को सैन्य उपकरण नहीं देगा।’’ वर्तमान में चीन ईरान के 90 प्रतिशत तेल का खरीदार है और तेहरान के साथ उसकी रणनीतिक एवं सैन्य साझेदारी है। ट्रंप ने शी चिनफिंग को ‘‘मिलनसार व्यक्ति’’ बताया, जिनका ध्यान अपने ‘‘काम पर केंद्रित’’ है। उन्होंने अपने स्वागत में हुए सैन्य सम्मान समारोह को ‘‘अद्भुत’’ बताया और कहा, ‘‘अगर आप हॉलीवुड भी जाएं, तो ऐसा दृश्य नहीं मिलेगा।’’

उन्होंने कहा कि चीन के साथ उनका रिश्ता बेहद सफल रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘हम चीन के साथ बहुत अच्छा कर रहे हैं। शी एक शानदार नेता हैं। वह लंबे समय से सत्ता में हैं, बेहद ताकतवर और मजबूत हैं। इसमें कोई शक नहीं। हमारे संबंध अच्छे हैं।’’ ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का बचाव करते हुए ट्रंप ने कहा कि यह अमेरिका के वियतनाम और इराक जैसे पिछले युद्धों की तुलना में बहुत छोटा अभियान है। उन्होंने दावा किया कि ईरान की नौसेना लगभग खत्म हो चुकी है और उसके पास अब प्रभावी वायुसेना तथा हवाई रक्षा क्षमता नहीं बची है।

ट्रंप ने कहा, ‘‘उन्होंने थोड़ी बहुत क्षमता हासिल की है। हम उसे एक दिन में खत्म कर देंगे।’’ ट्रंप के साथ टेस्ला प्रमुख एलन मस्क और एप्पल प्रमुख टिम कुक समेत बड़ी अमेरिकी कंपनियों के शीर्ष मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) भी आए हैं। उन्होंने कहा कि कारोबारी दिग्गजों ने शानदार काम किया है। ट्रंप ने बताया कि उन्होंने शी चिनफिंग को अमेरिका से तेल खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया, जिस पर शी ने कहा कि उन्हें ‘‘यह विचार पसंद आया है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘वे टेक्सास जाएंगे। हम चीनी जहाजों को टेक्सास, लुइसियाना और अलास्का भेजना शुरू करेंगे। मेरा मानना है कि इस पर सहमति बन गई है। यह बहुत बड़ी बात है।’’ ट्रंप ने इच्छा जताई कि चीन अपने बाजार खोले। उन्होंने कहा, ‘‘अगर चीन अपने बाजार खोलता है, तो यह हमारी कंपनियों के लिए अविश्वसनीय अवसर होगा और मुझे लगता है कि यह चीन के लिए भी अच्छा होगा।’’

अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी दावा किया कि शी चिनफिंग ने 200 बोइंग विमान खरीदने पर सहमति जतायी है। ट्रंप ने कहा, ‘‘बड़े विमान। यह बहुत बड़ा सौदा है।’’ इसके अलावा, उन्होंने चीन से व्यापार के लिए वीजा का उपयोग करने का अनुरोध किया और कहा कि चीन बड़ी मात्रा में अमेरिकी कृषि उत्पाद खरीदने वाला है, जिसे उन्होंने ‘‘बेहतरीन’’ बताया।

राष्ट्रपति ट्रंप की यह यात्रा ईरान के लिए एक कड़ा संदेश लेकर आई है। चीन के साथ रणनीतिक और व्यापारिक तालमेल बिठाकर ट्रंप ने ईरान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने और उस पर ‘अधिकतम दबाव’ बनाने की रणनीति को और तेज कर दिया है।

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Author: Real India News

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