किले को लेकर दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे
कसमंडी कलां के ऐतिहासिक ढांचे को लेकर लंबे समय से पासी समाज और मुस्लिम पक्ष के बीच अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं. पासी समाज इसे 11वीं सदी के महाराजा कंस पासी का किला और शिव उपासना स्थल बताता है. इसी दावे के आधार पर समाज सावन के पहले सोमवार को यहां जलाभिषेक करने की तैयारी में है. लाखन आर्मी ने विवादित स्थल का एएसआई से सर्वे कराने के साथ कार्बन डेटिंग कराने की मांग भी उठाई है. दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष वक्फ रिकॉर्ड का हवाला देते हुए इस जगह को मस्जिद, मकबरा और कब्रिस्तान की संपत्ति बताता है.
बढ़ाई गई सुरक्षा व्यवस्था
नए धार्मिक आयोजनों पर रोक
दोनों पक्षों के दावों और इलाके की संवेदनशील स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने विवादित स्थल पर किसी भी नए धार्मिक आयोजन या विशेष गतिविधि पर रोक लगा दी है. पुलिस की ओर से स्थानीय लोगों से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करें. सुरक्षा व्यवस्था के तहत संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ाई गई है. प्रशासन का फोकस किसी भी स्थिति में विवाद को बढ़ने से रोकने और शांति व्यवस्था कायम रखने पर है.
बच्चों के धर्मांतरण का भी मुद्दा उठा
कसमंडी किले के विवाद के अलावा संगठन ने मलिहाबाद में नट समाज के बच्चों के कथित धर्मांतरण का मुद्दा भी उठाया है. लाखन आर्मी के सूरज पासी का आरोप है कि इस मामले में थाने में शिकायत दिए जाने के बावजूद आरोपी मौलाना के खिलाफ पुलिस ने ठोस कार्रवाई नहीं की. संगठन ने धर्म परिवर्तन कराने के आरोपी मौलाना की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है. इसके साथ ही संगठन ने दिल्ली कूच का ऐलान भी किया है. फिलहाल कसमंडी कलां में दोनों पक्षों के आयोजनों को देखते हुए पुलिस-प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है.









