
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मंदिर परिसर के कुछ सीसीटीवी फुटेज जानबूझकर हटा दिए गए थे और दावा किया कि भक्तों द्वारा दान किए गए सोने, चांदी और अन्य कीमती चढ़ावे का कोई पारदर्शी डिजिटल रिकॉर्ड नहीं था। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने पूर्व लेखा अधिकारी द्वारा लगाए गए सभी आरोपों का पुरजोर खंडन किया है। राय के अनुसार, दान इकट्ठा करने, गिनने, ले जाने और जमा करने की पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से कंप्यूटरीकृत और पारदर्शी है। उन्होंने कहा कि इस प्रणाली का नियमित रूप से स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के अधिकारियों द्वारा ऑडिट किया जाता है और अब तक बड़े पैमाने पर वित्तीय हेराफेरी का कोई सबूत सामने नहीं आया है। हालांकि, विवाद को देखते हुए ट्रस्ट ने एक आंतरिक समीक्षा शुरू की है, जिसमें सीसीटीवी फुटेज की दोबारा जांच और नकदी संभालने की प्रक्रियाओं की पड़ताल शामिल है।
मगर इस घटनाक्रम के बाद एक सवाल लगातार उठ रहा है की मंदिर प्रबंधन से जुड़े लोग इस घटना के उजागर होने के बावजूद अब भी इस मामले को अफवाह बताने पर तुले हुए है , जब की दान पात्र में चोरी से जुड़े लोगो को चिन्हित कर उनसे चोरी की गयी रकम का कुछ हिस्सा बरामद भी किया जा चूका है , ऐसे में यह कहना गलत नहीं होंगे की चोरी के इस प्रकरण में प्रबंधन से जुड़े कुछ बेहद वरिष्ठ और प्रभावशाली लोग भी शामिल हो सकते है |









